नागालैण्ड का इतिहास और स्थापना कब?Nagaland

 


नागालैंड भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित एक खूबसूरत भारतीय राज्य है। नागा (बर्मी) भारत की एक प्रमुख जनजाति है।जो नागालैण्ड मे बहुसंख्यक रुप मे हैं।नागालैण्ड  1 दिसम्बर 1963 को भारत का 16वाँ राज्य बना। इसकी राजधानी कोहिमा है। असम घाटी के किनारे बसे कुछ क्षेत्रों को छोड़कर राज्य का अधिकतर हिस्सा पहाड़ी है राज्य के कुल क्षेत्रफल का केवल 9% हिस्सा समतल जमीन पर है। नागालैंड में सबसे ऊंची चोटी माउंट सरामती है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3840 मीटर है, नागालैण्ड का क्षेत्रफल 16,579 वर्ग किमी है।और 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 19,80,602 है।

नागालैंड का इतिहास और  संस्कृति विश्व भर में विख्यात है,नागालैंड का प्राकृतिक सौंदर्य भोजन,पहनावा और इसकी संस्कृति विश्व को अपनी ओर आकर्षित करती है। लोकगीत और नृत्य पारंपरिक लोक संस्कृति  मौखिक परंपरा को लोक कथाओं और गीतों के माध्यम से जीवित रखा गया है। लोक गीत रोमांटिक और ऐतिहासिक दोनों हैं। पूर्वजों और घटनाओं की पूरी कहानियां इन नृत्यों मे बताई गई  हैं।यह राज्‍य के पूर्व में म्यांमार, पश्चिम में असम, उत्तर में अरुणाचल प्रदेश,और दक्षिण में मणिपुर से घिरा हुआ है। और इसे ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। यहां के लोगों का मुख्य भोजन तो पोर्क चिकन से बनता है। लेकिन यहां के लोग सांप घोंघे, गिलहरी चूहा बिल्ली कुत्ते में जैसे दिखने वाले जानवरों मिथुन भैंस मकड़ी चिड़िया केकड़ा बंदर मधुमक्खी का लार्वा झींगा को भी बडे़ चाव से खाते हैं।

नागालैंड का कोई लिखित इतिहास नही है।जबकि पडोसी राज्यअसम के अहोम साम्राज्य में नागा समुदाय, उनकी अर्थव्यवस्था और रीती-रिवाजो का उल्लेख किया गया था।

1816 में जब म्यांमार के बर्मन ने असम पर आक्रमण किया तो इसके परिणामस्वरूप 1819 में दमनकारी बर्मन शासन की नीव रखी गयी। और 1826 में असम में ब्रिटिश शासन की स्थापना तक यह शासन चला।

1947 में भारत की आजादी के बाद, नागा समुदाय के लोग असम के छोटे से भाग में बसे हुए थे। जबकि मजबूत राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से नागा समुदाय के राजनितिक संघ की भी मांग की गयी। इस अभियान के चलते बहुत सी हिंसक गतिविधियाँ हुई और फिर 1955 में भारतीय सेना को व्यवस्था पुनर्स्थापित करने का आदेश भी दिया गया।

1957 में नागा नेता और भारत सरकार के बीच सहमति बनाने के बाद,असम के पहाड़ी क्षेत्रो में रहने वाले नागा और तुएंसंग फ्रंटियर डिवीज़न के नागाओ को भारत सरकार के प्रशासन में एक ही छत के नीचे लाया गया। सहमति के बावजूद भारत सरकार से असहकार, कर ना देना, तोड़-फोड़ और सेना पर आक्रमण करने जैसी हरकते होने लगी।उनकी इसको लेकर नागालैण्ड के विकास से मांगे  थी।

1960 में नागा लोगो के सम्मलेन वाली बैठक मे इस बात को पेश किया गया कि नागालैंड को भारतीय संघ का हिस्सा होना चाहिए। 1963 में नागालैंड को राज्य का दर्जा दिया गया और 1964 में लोकतांत्रिक ढंग से यहाँ एक कार्यालय की स्थापना की गयी।

1 दिसम्बर 1963 में कोहिमा को राज्य की राजधानी घोषित किया गया। इसके बाद भी

विद्रोही गतिविधियाँ जारी रही, साथ ही क्षेत्र में डाकुओ की संख्या भी बढ़ती रही। मोल भाव के साथ कुछ समय तक विद्रोह को रोका गया और मार्च 1975 में राज्य पर प्रत्यक्ष राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। फिर विद्रोही गुट सक्रिय रहे।

1975 मे सबसे बड़े विद्रोह समूहों के नेताओं ने अपने हथियार डालने और भारतीय संविधान को स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की।

1980 में शक्तिशाली समर्थक अलगाववादी चरमपंथी समूह, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड की स्थापना की गयी। वर्तमान मे भी नागालैण्ड मे 16 जनजातियाँ पायी जाती हैं।यह राजाय प्राकृतिक छटाओं से भरा है।यह विश्व को पर्यटन हेतु आकृषित करता है।

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