क्यों है गोवा पर्यटकों के लिए आकृषण का केन्द्र ?

 



प्राचीन साहित्य में गोवा को कई नामों से जाना जाता है गुमांचला, गोपकपट्टन, सिंदापुर  गोमांतक आदि। गोवा के प्राचीन इतिहास का आरंभ तीसरी सदी ईसा पूर्व से शुरू होता है। जब यहां मौर्य वंश के शासन की स्थापना हुई थी। बाद में पहली सदी के आरंभ में इस पर कोल्हापुर के सातवाहन वंश के शासकों का अधिकार स्थापित हुआ। 



और फिर बादामी के चालुक्य शासकों ने इस पर 580 ईस्वी से 750 ईसवी पर राज किया।और 1510 से शुरू हुआ पुर्तगाली शासन गोवा के लोगों को 451 सालों तक झेलना पड़ा। 19 दिसम्बर 1961 को गोवा आजाद हुआ।  यानी भारत की आजादी  के करीब साढे 14 साल बाद। वास्कोडिगामा ने 1498



 को भारत और उसके पड़ोसी  राज्यों की यात्रा की। 12 सालों के भीतर  ही पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा जमा लिया।1510 मे पूर्तगालियों ने एक स्थानीय सहयोगी तिमय्या की मदद से सत्तारूढ बीजापुर के राजाओं को कराया, जिसके बाद (वेल्हा) गोवा मे एक स्थायी समझौता हुआ। मसालों के ब्यापार के कारण पुर्तगाली प्रभुत्व के दौरान गोवा अपने स्वर्ण युग मे आया। 17 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना गोवा में प्रवेश करती है।आपरेशन विपय के तहत



 पुर्तगाली जनरल मैनुअल एंटोनियो वसालो ए सिल्ला ने महज 36 घंटों में ही आत्म समर्पण के दस्तावेज पर दस्तखत कर दिये। आजादी की अलख डाक्टर राम मनोहर लोहिया ने 1946 को जला दी थी। और गोवा आजाद हो जाता है। 19 दिसंबर को भारतीय मानचित्र पर गोवा दमन और दीव नामक एक केंद्र शासित क्षेत्र आकार लेता है।गोवा पर्यटकों के लिए बहुत



 आकृषण का केन्द्र है। क्योंकि यहां जंगल, प्राचीन स्मारक,रेतीले समुद्र तट, और बहुत रमणीय ब्यंजनों का मिश्रण पाया जाता है। गोवा के उत्तर से दक्षिण तक यात्रा के हर पांच मिनट मे नया समुद्र तट देखने को मिलता है।गोवा पार्टी और बीच के लिए जाना जाता है। इसके बाद 30 मई 1987 को गोवा को एक राज्य के तौर पर मान्यता दी जाती है।



 गोवा मुंबई से लगभग 400 किमी दूरी पर दक्षिण मे है। वर्तमान मे गोवा मे 65 प्रतिशत हिन्दू, 24 प्रतिशत ईसाई और बाकी अन्य हैं।गोवा की राजभाषा कोंकणी है।

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